Posts

देखो आया मधुमास

देखो आया मधुमास, किसको  सताने   किसी को हँसाने, किसी को रुलाने ॥  देखों, आया मधुमास....  मन गया जिसका, साथ सजन के ।  आग लगाये मधुमास, उसके तन के ।। लिए स्नेह का बन्धन, प्रीती की डोरी।  नित बाट निहारे , बिरहन किशोरी ॥ मलय पवन आया, अगन बढ़ाने किसी को हँसाने, किसी को रुलाने  देखों, आया मधुमास.......   प्रियतम है उसके, नैनो के काजल ।  मधुर विरह में, जल रही पागल पाती पिया को लिखें वह सुकूमारी  सुधि ले लो साजन यह अरज हमारी भूल के हमकों, लगे किस को रिझाने  किस को हँसाने, किसको रुलाने  देखो, आया मधुमास.... हँसी-सी खिली है हर बाग की डाली।  झूम रही जैसे, लगे कोई मतवाली ।  कोमल की कुक हमको सताये ।  मधुर मिलन की याद दिलाये । भौरे तू आ जा, रस को बढ़ाने  देखों आया मधुमास.....

रूप कामिनी

Image
बालापन अब बीत गया, आई नूतन तरुनाई । कंदर्प रूप लजाने को , वह रति रूप में आई ।                       बसंत-सा श्रृंगार उसका ,                      देह फुलवारी बन आयी है l                      कार्य- निवृति लेकर जिसको ,                      प्रकृति निज हाथो से सजाई है ।। कांति वर्णन क्या क्या करें , चांद ही कामिनी बन आया है। दूर खड़ा वह देख रहा, मानो चंद्रकला   इसी से पाया है ।।                     उसके गुलाबी होठों पर ,                     मुग्ध कई जिंदगी हुई ।                     एक बार सही , सौ बार सही ,                     थोड़ी -सी सही ...

मां

मेरे गिरते -संभालते गुलशन की बागवान है ।    भक्त हूं मैं उसका ,वह मेरी भगवान है।। क्या लिखूं उसके  लिए , अल्फाज भी हैं मेरे छोटे ।  वह माली है इस पौधे की, ना होती तो हम कहां होते  *मां के लिए क्या लिखूं अल्फाज कम हैं  तू सलामत रहें , तुझसे ही हम हैं ।।* *अपने परिंदे के लिए मां , तू  वट वृक्ष है धूप में । तू ही ईश्वर है  या ईश्वर ही  है मां  तेरे रूप में ।।*

💐नारी ही सबसे महान है💐

Image
कहीं काली कहीं दुर्गा, कहीं वैष्णवी पूजी जाती हैं   इस नारी पूज्य संसार में, नारी गर्भ में मारी जाती हैं ||  कभी सीता कभी सावित्री, कभी लक्ष्मीबाई कहलाती हैं |  दहेज लोभी संसार में, नारी गर्भ में मारी जाती है ||  मां बन पाले बच्चों को,  बन बहन कलाई सजाती है|   फिर भी क्यों इस देश में, नारी गर्भ में मारी जाती है ||   जग में यदि नारी ना होगी, तो सोचो क्या होगा | कैसे नर पैदा होगा, कैसे पालन होगा |   नारी का सम्मान करो तुम  इसी में सबका कल्याण है | दूजा नहीं सामान कोई, नारी ही सबसे महान है ||

उन्हें क्या नाम दूँ

शाम ढलते ही चांद निकलता है  अंबर की आंचल में कोई फूल खिलता है   इन अरमानों को दिल में क्या अंजाम दूं  दिल समझा पता नहीं उन्हें क्या नाम दूं   हर शाम सुहानी हो जाती है, जब याद तुम्हारी आती है  मां मंदिर में गुंजन होता है  हर कंपन तुम्हें ढूंढता है  चाहत के इस पलकों में कैसे विश्राम दूं | दिल समझा पता नहीं तुम्हें क्या नाम दूं ||  रोशनी हो जाती है दिल के अंधेरे में  किरण खिल जाती है यादों के बसेरे में   रूप बन जाता है दिल की दीवारों पर  रूह को जाता है ऐसे विचारों पर  यादों की इस बारिश को कैसे मैं संभाल लूं |  दिल समझा पता नहीं उन्हें क्या नाम दूं  ||

शर्म तुम्हें क्यों आती हैं कहलाने में हिंदुस्तानी 💖💖

Image
पूछ रही है भारत माता लेकर आंखों में पानी | अब शर्म तुम्हें क्यों आती है कहलाने में हिंदुस्तानी ||   तुम उन वीरों के वंशज हो  जो डरे नहीं दहाड़ो से | बड़े-बड़े को डिगा दिया, बरछी भला तलवारों से || आज समय फिर आ गया है,  करने को सफल जवानी | अब शर्म तुम्हें क्यों आती है कहलाने में हिंदुस्तानी ||  क्यों भूल गए तुम राणा को,  जिसने हल्दीघाटी का इतिहास बनाया |  मातृभूमि की रक्षा खातिर, वन वन भटका घास चबाया | अधीनता आने न दिया,अमर हुआ स्वाभिमानी | अब शर्म तुम्हें क्यों आती है कहलाने में हिंदुस्तानी ||  नारी होकर लक्ष्मीबाई ने, अंग्रेजों से बिगुल बजाया |  दे कुर्बानी मंगल पांडे ने,  स्वतंत्रता का अलख जगाया | फिर बेड़िया तोड़ने को, सारी जनता हुई दीवानी | अब शर्म तुम्हें क्यों आती है कहलाने में हिंदुस्तानी ||  याद करो तिलक आजाद को,  जिसने जीवन कुर्बान किया |  अशफाक गुरु संग भगत ने, जीवन वार दिया | क्यों फटा न सीन तेरा,क्यों आया ना आंखों में पानी|  अब शर्म तुम्हें क्यों आती है कहलाने में हिंदुस्तानी ||  गांधी सुभाष टैगोर ...

ख्वाब आए थे दिल में

क्यों नमी है पलक पर तुम्हारे लिए ?   ख्वाब आए थे दिल में ,क्या हमारे लिए ?  रात सपने में आयी,  वह बनके परी । बात करता रहा , पास थी वह खड़ी ।। जान कर भी क्यों अनजान बनती हो प्रिये । अब तुम्हीं जता दो , हम कैसे जिएं ।।  ठहर जाती  है सांसे ,क्यों तुम्हारे लिए …. ख्वाब आए थे दिल में ,क्या हमारे लिए ?  क्यो नमी है पलक पर  ……..  दिल की बातें हमें भी जताया करो । गर कमी है कहीं तो , बताया करो ।। इश्क का है ये मौसम , मन बेहाल है । कहता है पवन ,जो तेरा  हाल है ।। दर्द सहता हूं क्यों ,ये तुम्हारे लिए … ख्वाब आए थे दिल में ,क्या हमारे लिए ?   क्यों नमी है पलक पर ……. देखो पूरब में लाली यह क्या कह रही ,   पश्चिम के उजियाली में क्या ढल रही । क्षितिज से बुलाता किसी को कोई , ऐसा लगता है आसमा अभी है रोई चांदनी बिखर रही है ,क्या तुम्हारे लिए  ख्वाब आए थे दिल में ,क्या हमारे लिए  ।                       ✒️ अष्टभुजा पांडेय