शर्म तुम्हें क्यों आती हैं कहलाने में हिंदुस्तानी 💖💖
पूछ रही है भारत माता लेकर आंखों में पानी |
अब शर्म तुम्हें क्यों आती है कहलाने में हिंदुस्तानी ||
तुम उन वीरों के वंशज हो
जो डरे नहीं दहाड़ो से |
बड़े-बड़े को डिगा दिया,
बरछी भला तलवारों से ||
आज समय फिर आ गया है,
करने को सफल जवानी |
अब शर्म तुम्हें क्यों आती है कहलाने में हिंदुस्तानी ||
क्यों भूल गए तुम राणा को,
जिसने हल्दीघाटी का इतिहास बनाया |
मातृभूमि की रक्षा खातिर,
वन वन भटका घास चबाया |
अधीनता आने न दिया,अमर हुआ स्वाभिमानी |
अब शर्म तुम्हें क्यों आती है कहलाने में हिंदुस्तानी ||
नारी होकर लक्ष्मीबाई ने,
अंग्रेजों से बिगुल बजाया |
दे कुर्बानी मंगल पांडे ने,
स्वतंत्रता का अलख जगाया |
फिर बेड़िया तोड़ने को, सारी जनता हुई दीवानी |
अब शर्म तुम्हें क्यों आती है कहलाने में हिंदुस्तानी ||
याद करो तिलक आजाद को,
जिसने जीवन कुर्बान किया |
अशफाक गुरु संग भगत ने,
जीवन वार दिया |
क्यों फटा न सीन तेरा,क्यों आया ना आंखों में पानी|
अब शर्म तुम्हें क्यों आती है कहलाने में हिंदुस्तानी ||
गांधी सुभाष टैगोर भगत,
फूल अनेक इस बागों के|
खुद माली बन खिला गए,
जीवन निसार भू भागों पे |
47 में आजाद कराया तब अमिट बनी कहानी |
अब शर्म तुम्हें क्यों आती है कहलाने में हिंदुस्तानी ||
✒️अष्टभुजा पाण्डेय
Comments
Post a Comment