ख्वाब आए थे दिल में
क्यों नमी है पलक पर तुम्हारे लिए ?
ख्वाब आए थे दिल में ,क्या हमारे लिए ?
रात सपने में आयी, वह बनके परी ।
बात करता रहा , पास थी वह खड़ी ।।
जान कर भी क्यों अनजान बनती हो प्रिये ।
अब तुम्हीं जता दो , हम कैसे जिएं ।।
ठहर जाती है सांसे ,क्यों तुम्हारे लिए ….
ख्वाब आए थे दिल में ,क्या हमारे लिए ?
क्यो नमी है पलक पर ……..
दिल की बातें हमें भी जताया करो ।
गर कमी है कहीं तो , बताया करो ।।
इश्क का है ये मौसम , मन बेहाल है ।
कहता है पवन ,जो तेरा हाल है ।।
दर्द सहता हूं क्यों ,ये तुम्हारे लिए …
ख्वाब आए थे दिल में ,क्या हमारे लिए ?
क्यों नमी है पलक पर …….
देखो पूरब में लाली यह क्या कह रही ,
पश्चिम के उजियाली में क्या ढल रही ।
क्षितिज से बुलाता किसी को कोई ,ऐसा लगता है आसमा अभी है रोई
चांदनी बिखर रही है ,क्या तुम्हारे लिए
ख्वाब आए थे दिल में ,क्या हमारे लिए ।
✒️ अष्टभुजा पांडेय
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