कबिता

देखो आया यह मधुमास किसको सताने
 किसी को हंसाने किसी को रुलाने
देखों आया यह मधुमास किसको सताने..
मन गया जिसका साथ सजन के
 आग लगाए मधुमास उसके तन के 
 लिए स्नेह का बंधन, प्रीत की डोरी
 बाट निहारे नित, विरहन किशोरी
 मधुर पवन आया आग लगाने | 
देखों आया  मधुमास........... 

 प्रियतम है उसके नैनो के काजल
मधुर विरह में जले वह पागल 
पाती पिया कि लिखें वह सुकुमारी 
सुध लेलो साजन, है अरज हमारी,
भूल हमें, लगे किसको रिझाने 
आया मधुमास.......

हसीं सी खिली है, हर एक डाली 
झूम रही लगे कोई मातवाली 
कोयल की मिठी कूज सताए 
मधुर मिलन की याद दिलाये 
भौरे तू आजा रस को चुराने 
आया मधुमास, किसको सताने...


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