प्रेम क्या है ?

प्रेम 

सच्चे अर्थों में एक कामना है,
प्रियजनों की शुभकामना है ,
सुंदर समाज की कल्पना है ,
स्वस्थ परिवेश का प्रमाण है
जो जी रहे हैं जीवन
प्रेम तो उसी का नाम ।
प्रेम ही जीवन,
मरण प्रेम है ।
प्रेम ही आशा ,
अभिलाषा भी प्रेम है।
दिवस प्रेम है, प्रेम ही शाम है ।
प्रेम ही जीवन का पैगाम ।
मन विस्मृत में जीवन विस्तार का ,
पलकों में नवसृजन आधार का,
नूतन ,मंगल ,जीवन जंजाल का
युवती का यौवन,धन है कंगाल का ।
यह लक्ष्य नहीं,  यह सिद्धि है
विघटन नहीं , वृद्धि है
तन मन धन सब की समृद्धि है।
ख्वाबों का एक रास है ,
प्रेम तो केवल एक विश्वास है ।

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