भूखे को मिलता दुत्कार


पड़ोस के मेरे एक सज्जन ,
निकले ललाट पर लेपकर चंदन ।
हाथ में पुष्प, हार गले में
मुख से करते हरि का कीर्तन ।
पहुंचे देवालय बड़े भोर
देखा बंदरो का बृहद शोर ।
उमड़ा उर में विकल विषाद ,
देने लगे साथ ले गए प्रसाद ।
कुछ बच्चे भी वहां विहार रहे थे ।
विकल भूख से निहार रहें थे ।।
आशा चमकी भोज्य देखकर ले आए जो साथ
बच्चों को शैतान बता कर बंदरो में थे रहे बांट ।
भूख भी बड़ी विचित्र है ,
जिसका ना कोई चित्र है ।
घर घर पाले जाते कुत्ते ,
भूखों को मिलता दुत्कार,।
मानवता को ताक पर रखकर
कुत्तों को अब मिलता प्यार ।।






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