जीवन है संग्राम

*जीवन है संग्राम*

जीवन है संग्राम , हमें लड़ना पड़ेगा ।
रात कितनी हो कठिन, हमें चलना पड़ेगा।।

लोग अक्सर यूं ही घर छोड़ने को झिझकते हैं  ।
राह दिखाई जाती है ,जब आगे बढ़ते हैं ।
लाख ठोकरें खाकर संभल जाते हैं ,
धारा की भांति चलते हैं ,वही मंजिल पाते हैं।।
अरमान रख दिल में , पूरा करना पड़ेगा ,
राह कितनी हो कठिन हमें चलना पड़ेगा।।
जीवन है संग्राम................

हार जाते है अक्सर, देखकर ऊंची राहें ।
जिसे छिनना है उसे , पानी को फैला देते हैं बांहे।
मांगना न पड़ता, अगर दिल में तूफान होते।
मंजिल करीब होती ,जो थक हारकर ना सोते।।
इन कुंठाओ को दिल से निकालना पड़ेगा ,
राह कितनी भी हो कठिन हमें चलना पड़ेगा।।
जीवन है संग्राम.................

क्यों रुक गए पथिक ,इस राह में अकेले ।
रख हौसला ,बढ़ आगे, मिलेंगे दुनिया के मेले।
पगडंडीया  जो छुटी तो कुछ नहीं खोया ।
कई रास्ते मिलेंगे , गर तुम हौसला न खोया ।।
उन रास्तों का फिर , पहचान करना पड़ेगा।
राह कितनी भी हो कठिन हमें चलना पड़ेगा।।

जीवन है संग्राम , हमें लड़ना पड़ेगा 
राह कितनी हो कठिन हमें चलना पड़ेगा ।।


       ✍️ *अष्टभुजा पांडेय*

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