मेरी यादें
मेरी यादें
प्रेम की मीठी बारिश में ,
तन को मैं भिगोता हूं ।
जग घोर निशा में सोता है,
मैं यादों में खो जाता हूं।।
मन में एक आशा है,
आंखों में एक किरन ।
उसकी हंसी है सपनों में,
जैसे सोने की हो हिरन ।।
प्रेम प्रवाह में बहकर मैं ,
आशा की ज्योति जलता हूं।
जग घोर निशा में सोता है,
मै यादों में खो जाता हूं।।
प्रेम की मीठी............
ध्यान मेरे मन की ,
वह अपनी तरफ खींचती है।
मैं देखूं तो रूठ जाए ,
फिर छिप कर मुझे देखती है ।।
पलकों से अपने ,चेहरा उसका
कभी ना मिटा पाता हूं।
जग घोर निशा में सोता है
मैं यादों में खो जाता हूं ।।
प्रेम की मीठी....….................
बातें उसकी कोयल जैसी,
नैनो की क्या उपमा है ?
बादलों से प्रतीत होती,
बालों की उसकी सुषमा है।।
दिल से आवाज निकलती है,
पर कहाने को मैं डरता हूं।
जग घोर निशा में सोता हूं,
मैं यादों में खो जाता हूं।।
प्रेम की मीठी बारिश में................
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